‘आतंकी किले’ में खून! मरकज तैयबा के अंदर घुसकर बिलाल सलाफी का अंत

अजमल शाह
अजमल शाह

ईद की नमाज खत्म हुई… दुआओं के बीच अचानक गोलियों की आवाज गूंजी… और पाकिस्तान का सबसे सुरक्षित आतंकी अड्डा ‘मरकज तैयबा’ खून से लाल हो गया। जिस किले में घुसना नामुमकिन माना जाता था, वहां घुसकर किसी ने खेल खत्म कर दिया—वो भी लश्कर के ‘रीढ़’ माने जाने वाले बिलाल सलाफी का। सवाल अब ये नहीं कि हमला कैसे हुआ… सवाल ये है कि अंदर तक पहुंचा कौन?

‘अभेद्य किला’ या कागज़ की दीवार?

मुरीदके का मरकज तैयबा—जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता… यही दावा था। लेकिन ईद के दिन ये दावा चकनाचूर हो गया। नमाज खत्म होते ही हमलावर अंदर घुसे और सीधे टारगेट पर फायर झोंक दिया।

पहले गोलियां… फिर चाकू से वार—ये कोई आम हत्या नहीं थी, ये ‘मैसेज’ था। ऐसा मैसेज जो सीधे आतंकी नेटवर्क के दिल में घुसकर दिया गया।

कौन था बिलाल सलाफी?

बिलाल आरिफ सलाफी कोई छोटा नाम नहीं था।

  • लश्कर-ए-तैयबा का रिक्रूटमेंट मास्टर
  • युवाओं को कट्टर बनाने का ‘फील्ड ट्रेनर’
  • कश्मीर मॉड्यूल का अहम खिलाड़ी

यानी वो चेहरा, जो बंदूक नहीं उठाता था… लेकिन बंदूक उठाने वालों की फौज तैयार करता था।

हमला: फिल्मी सीन नहीं, असली ‘ऑपरेशन’

हमले का तरीका चौंकाने वाला है।

  • नमाज के बाद टाइमिंग चुनी गई
  • अंदर घुसकर क्लोज-रेंज शूटिंग
  • फिर चाकू से कन्फर्म किल

कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं—हमलावरों में एक महिला भी शामिल थी। यानी प्लानिंग इतनी गहरी थी कि शक की सुई तक नहीं उठी… जब तक ट्रिगर दबा नहीं।

‘डकैत वाला अंत’—अपने ही गढ़ में ढेर

जिस तरह फिल्मों में गैंगस्टर अपने ही इलाके में मारा जाता है, वैसा ही सीन यहां दिखा। फर्क बस इतना कि यहां कैमरा नहीं… खौफ असली था।

मरकज तैयबा, जिसे लश्कर का ‘आतंकी मंदिर’ कहा जाता है, वहीं पर ये खूनखेल हुआ। ये सिर्फ हत्या नहीं—ये सिस्टम की नाकामी का लाइव टेलीकास्ट है।

डिफेंस एक्सपर्ट अजीत उज्जैनकर का बड़ा बयान

“ये सिर्फ एक कमांडर की हत्या नहीं है, ये पूरे आतंकी इकोसिस्टम की पोल खोलने वाला ऑपरेशन है। जिस मरकज तैयबा को पाकिस्तान सालों से ‘सुरक्षित ज़ोन’ बताता रहा, वहां घुसकर इस तरह का अटैक होना बताता है कि या तो अंदर से दरारें हैं… या फिर खेल कहीं और से कंट्रोल हो रहा है। और याद रखिए—जब आतंकी अपने ही गढ़ में सुरक्षित नहीं, तो इसका मतलब है कि खेल अब बदल चुका है। ये ‘हंटिंग फेज’ है, जहां शिकारी खुद शिकार बन रहा है।”

हाफिज सईद नेटवर्क में दहशत

इस हमले के बाद सबसे ज्यादा खलबली लश्कर के टॉप ब्रास में है। हाफिज सईद जैसे चेहरे अब अपने ही ठिकानों पर सुरक्षित नहीं महसूस कर रहे।

क्योंकि हमला सिर्फ एक इंसान पर नहीं हुआ… ये ‘मनोवैज्ञानिक वार’ है—जो पूरे नेटवर्क को हिला देता है।

बड़ा सवाल: अगला नंबर किसका?

अब पाकिस्तान के आतंकी ढांचे के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ये अंदरूनी गुटबाजी है? या कोई बाहरी ‘साइलेंट ऑपरेशन’?

जो भी हो… इतना तय है कि ‘सेफ हेवन’ का मिथक टूट चुका है।

डर का नया एड्रेस

मुरीदके अब सिर्फ एक जगह नहीं रहा… ये एक संकेत है कि आतंकी अब कहीं सुरक्षित नहीं, कि खेल अब खुला है और कि ‘शिकार’ बनने की बारी बदल चुकी है।

वायरल फोटो के बाद गिरी कुर्सी! नासिक बाबा कांड में चाकणकर का इस्तीफा

Related posts

Leave a Comment